
बस्ती में ‘अटल’ व्यवस्था पर लगा सवालिया निशान, छात्रों की भिड़ंत से दहला परिसर
प्रधानाचार्य को हटाने की मांग पर अड़े छात्र, विद्यालय में 'अटल' नहीं दिख रहा अनुशासन; दबाने की कोशिश, फिर भी उजागर: अटल आवासीय विद्यालय में प्रशासनिक विफलता की पोल खुली
अजीत मिश्रा (खोजी)
अटल आवासीय विद्यालय: शिक्षा का मंदिर या हिंसा का अखाड़ा?
- बस्ती: अटल आवासीय विद्यालय में बवाल, जांच के नाम पर क्या केवल लीपापोती होगी?
- छात्रों की सुरक्षा भगवान भरोसे? अटल आवासीय विद्यालय में हिंसक भिड़ंत के बाद प्रशासनिक हलचल
- SDM की सख्ती के बाद जागा विद्यालय प्रशासन, पर व्यवस्थाओं पर कायम गंभीर सवाल
बस्ती। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘अटल आवासीय विद्यालय’ का उद्देश्य निर्धन और मेधावी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुरक्षित माहौल देना था। लेकिन, बस्ती के बसेवा राय स्थित अटल आवासीय विद्यालय में छात्रों के बीच हुई हिंसक भिड़ंत ने इस पूरी परिकल्पना और विद्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। सवाल यह है कि जिस परिसर में बच्चों के भविष्य को संवारा जाना चाहिए था, वहाँ लाठियां-घूंसे क्यों चल रहे हैं?
प्रशासन की ‘लीपापोती’ की कोशिश नाकाम
घटना के बाद विद्यालय प्रशासन और प्रधानाचार्य की भूमिका सबसे अधिक संदेह के घेरे में है। आरोप है कि विद्यालय प्रबंधन ने मामले की गंभीरता को समझने के बजाय उसे दबाने और सच्चाई पर पर्दा डालने का कुत्सित प्रयास किया। यदि उपश्रमायुक्त रचना केसरवानी, एसडीएम हरैया उमाकांत तिवारी और सीओ स्वर्णिमा सिंह को मौके पर पहुंचकर कमान संभालनी न पड़ती, तो शायद यह मामला एक और ‘बंद कमरे’ का रहस्य बनकर रह जाता। प्रशासन की यह चुप्पी न केवल गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि छात्रों की सुरक्षा के प्रति उनकी उदासीनता को भी दर्शाती है।
प्रधानाचार्य की कार्यशैली पर सवाल
छात्रों और छात्राओं का आक्रोश केवल हिंसा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विद्यालय प्रशासन के प्रति गहरा अविश्वास भी है। बच्चों द्वारा प्रधानाचार्य को हटाने की मांग करना यह स्पष्ट करता है कि विद्यालय में व्यवस्था और नेतृत्व का गंभीर संकट है। क्या विद्यालय प्रबंधन बच्चों का विश्वास खो चुका है? यह एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब जिला प्रशासन को गंभीरता से देना होगा।
सुरक्षा व्यवस्था केवल कागजों पर?
अटल आवासीय विद्यालय परिसर में छात्रों की सुरक्षा का जिम्मा आखिर किसका है? यदि छात्र परिसर के भीतर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और आपस में हिंसक हो रहे हैं, तो यह विद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था की पूर्ण विफलता है। एसडीएम हरैया द्वारा जांच के निर्देश और दोषियों पर कार्रवाई के आश्वासन से उम्मीद तो बंधी है, लेकिन केवल ‘दोषियों पर कार्रवाई’ काफी नहीं है। आवश्यकता है विद्यालय की पूरी कार्यप्रणाली और प्रशासनिक ढांचे के ऑडिट की।
निष्कर्ष
बस्ती के इस विद्यालय की घटना मात्र एक अनुशासनहीनता का मामला नहीं है, यह एक ‘सिस्टम फेल्योर’ है। शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि अटल आवासीय विद्यालय सुधार गृह न बनें और न ही हिंसा के अखाड़े। यदि प्रशासन ने इस मामले में कठोर और पारदर्शी कार्रवाई नहीं की, तो यह उन हजारों बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा जो उम्मीद लेकर इन विद्यालयों में प्रवेश लेते हैं।
समय आ गया है कि विद्यालय प्रशासन की मनमानी पर लगाम लगे और बच्चों के लिए एक भयमुक्त वातावरण सुनिश्चित हो। अन्यथा, सरकार के इस नेक इरादे पर ‘अटल’ सवालिया निशान हमेशा के लिए लग जाएंगे।

















